ब्रेकिंग
पेट्रोल-डीजल बचत पर बड़ा फैसला: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटाया अपना कारकेड हरियाणा की 5.72 लाख रुपए कीमत की अवैध शराब पकड़ाई, इंदौर आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई ट्रैक्टर का चालक नशे में मिला, इंदौर ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता से टला बड़ा हादसा! ट्रैक्टर पर लगा था नगर निगम का बोर्ड नगर निगम कार्य में लगे ट्रैक्टर का चालक नशे में पकड़ा, ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता से टला हादसा किसानों को बड़ी राहत: गेहूँ उपार्जन का 10,403 करोड़ रुपये भुगतान, 23 मई तक जारी रहेगी खरीदी विद्यार्थियों को दूसरा मौका, सपनों को नई उड़ान देने का संकल्प : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पीले चावल बांटकर किसान आंदोलन का न्योता, 7 मई 2026 के चक्काजाम से पहले की जारी की गई एडवाइजरी इंदौर में अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़, ‘डायमंड सर्वर’ से चल रहा था नेटवर्क 23,437 करोड़ की 3 बड़ी रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी, 6 राज्यों में बढ़ेगा रेल नेटवर्क इंदौर आबकारी विभाग की कार्रवाई: स्कूटर से शराब जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- बहू को है सास-ससुर के घर में रहने का अधिकार

नई दिल्ली।  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक एक ऐतिहासिक फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत बहू को अपने पति के माता-पिता के घर में रहने का अधिकार है। न्यायाधीश अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने तरुण बत्रा मामले में दो न्यायाधीशों की पीठ के फैसले को पलट दिया है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि परिवार की साझा संपत्ति और रिहायशी घर में भी घरेलू हिंसा की शिकार पत्नी को हक मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत दिए अपने फैसले में साफ कहा है कि पीड़ित पत्नी को अपने ससुराल की पैतृक और साझा संपत्ति यानी घर में रहने का कानूनी अधिकार होगा। पति की अर्जित की हुए संपत्ति यानि अलग से बनाए हुए घर पर तो अधिकार होगा ही। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में घरेलू हिंसा कानून 2005 का हवाला देते हुए कई बातें स्पष्ट की है।

पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दो सदस्यीय पीठ के फैसले को पलटते हुए 6-7 सवालों के जवाब भी दिए।पीठ ने यह फैसला साल 2006 के एसआर बत्रा और अन्य बनाम तरुण बत्रा के मामले की सुनवाई करते हुए सुनाया।

गौरतलब है कि तरुण बत्रा मामले में दो जजों की पीठ ने कहा था कि कानून में बेटियां, अपने पति के माता-पिता के स्वामित्व वाली संपत्ति में नहीं रह सकती हैं। अब तीन सदस्यीय पीठ ने तरुण बत्रा के फैसले को पलटते हुए 6-7 सवालों के जवाब दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पति की अलग-अलग संपत्ति में ही नहीं, बल्कि साझा घर में भी बहू का अधिकार है।

मालूम हो कि पहले दो सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि एक पत्नी के पास केवल अपने पति की संपत्ति पर अधिकार होता है. तरुण बत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निधि गुप्ता ने ने दलील पेश की। उन्होंने कहा कि अगर बहू संयुक्त परिवार की संपत्ति है, तो मामले की समग्रता को देखने की जरूरत है। साथ ही उसे घर में निवास करने का अधिकार है। इसके बाद अदालत ने दलील को स्वीकार कर लिया।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.