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17 साल पहले तलाक देकर गई बीवी के लौटने पर दूसरी बीवी को बच्चों समेत घर से निकाला

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है जहां एक स्वास्थ्य अधिकारी ने 17 साल बाद लौटी पहली तलाकशुदा पत्नी के लिए वर्तमान में साथ रह रही पत्नी को छोड़ दिया है। दूसरी पत्नी जिसके दो बच्चे भी है ने भरण पोषण के लिए कुटुंब न्यायलय की शरण ली है। वहीं पति ने पत्नी को भरण पोषण की राशि देने से साफ इंकार कर दिया है क्योंकि उसका कहना है कि लॉकडाउन में सैलरी नहीं मिली है। हालांकि कोर्ट ने उसकी दलील को न मानते हुए भरण पोषण की पे स्लिप देने के आदेश दिए हैं।

बनते दिरकते रिश्तों का यह अनोखा मामला ग्वालियर का है। एक सरकारी स्वास्थ्य अधिकारी जो अच्छे पद हैं ने अपनी दो बच्चों समेत दूसरी पत्नी को 17 साल लौटी पहली पत्नी के लिए छोड़ दिया। जानकारी के मुताबिक अधिकारी का तबादला दूसरे शहर में हुआ तो पहली पत्नी और अधिकारी में झगड़े होने लगे। तकरार बढ़ गई तो 2003 में आपसी सहमति से तलाक हो गया।

इसके बाद अधिकारी ने दूसरी शादी कर ली। उसके 2 बच्चे एक बेटा और बेटी है। दोनों स्कूल में पढ़ते हैं। फिर अचानक 17 साल बाद जनवरी 2020 में उसकी पहली पत्नी उसके संपर्क में आई। अधिकारी ने उसे भी साथ रख लिया। इस वजह से घर में कलह बढ़ गई तो अधिकारी ने दूसरी पत्नी को घर छोड़ने के लिए कह दिया।

अब दूसरी पत्नी में कुटुंब न्यायलय में केस दर्ज कराया तो पति ने भरण पोषण देने से मना कर दिया और दलील दी कि उसे लॉकडाउन में सैलरी नहीं मिली। लेकिन कोर्ट ने उसकी दलील ठुकरा दी और कहा कि उसे भरण पोषण हर हालात में देना ही होगा।

इस मामले में जिला कोर्ट के अधिवक्ता और पूर्व लोक अभियोजक जगदीश शर्मा के मुताबिक सीआरपीसी की धारा 125 में पत्नी को भरण पोषण की राशि पाने का अधिकार है। यह पत्नी कई स्थितियों में ले सकती है।  जब पति घर से निकाल दे, साथ रखने से मना कर दे तो वह अपने जीवन यापन के लिए राशि मांग सकती है।

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