Cover
ब्रेकिंग
शादी के बाद एक्स ब्वॉयफ्रेंड कुशाल टंडन से टकराईं गौहर ख़ान, दिया ये रिएक्शन राहुल के इटली ट्रिप पर भाजपा का निशाना, शिवराज बोले- स्‍थापना दिवस पर ‘9 2 11’ हो गए, कांग्रेस ने दी सफाई पीएम मोदी, भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं ने दी श्रद्धांजलि दर्ज हुए 20 हजार से अधिक संक्रमण के नए मामले, 279 मौत; जानें अब तक का पूरा आंकड़ा उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत Delhi AIIMS में कराएंगे उपचार, कोरोना से हैं संक्रमित देश की पहली ड्राइवरलेस मेट्रो को पीएम ने दिखाई हरी झंडी, दिल्ली में रफ्तार भरने लगी ट्रेन किसान नेता राकेश टिकैत को फोन पर मिली जान से मारने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस Year 2021- नया साल लेकर आ रहा ग्रहण के चार गजब नजारे, पूर्ण चंद्रग्रहण से होगी शुरुआत शीतकालीन सत्र पर बोले नरोत्तम, सरकार की कोशिश कि इसे न टाला जाए, कांग्रेस पर भी साधा निशाना MP के इस गांव में न सड़क है न कोई सुविधा, खाट पर रखकर ग्रामीण 3 KM ले गए शव

केरल पुलिस अधिनियम में विवादास्पद संशोधन किया गया निरस्त, सरकार ने लिया फैसला

तिरुअनंतपुरम। केरल सरकार ने पुलिस अधिनियम में विवादास्पद संशोधन को निरस्त कर दिया है। राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान ने इससे संबंधित अध्यादेश पर बुधवार को हस्ताक्षर किया। पुलिस कानून में इस संशोधन को लेकर विवाद हो गया था और इसे अभिव्यक्ति स्वतंत्रता और मीडिया की आजादी पर हमला बताया गया था। विवाद बढ़ने के बाद राज्य की वाममोर्चा सरकार ने मंगलवार को कहा था कि वह इस संशोधन को वापस लेने के लिए अध्यादेश लाएगी।

इसके बाद कैबिनेट की बैठक में केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118-ए को खत्म करने के लिए अध्यादेश राज्यपाल के पास भेजा गया था, जिन्होंने बुधवार को इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिया। राज्य सरकार का कहना था कि महिलाओं और बच्चों को साइबर अपराध से बचाने के लिए यह संशोधन किया गया है। इसमें इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करने पर पांच साल तक कैद की सजा का प्रावधान था।

विपक्षी दलों ने इसे मीडिया की आजादी के खिलाफ बताया था। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भी सोमवार को दिल्ली में पत्रकारों से कहा था कि इस पर विचार किया जाएगा। इसके बाद ही पिनराई विजयन सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला किया था।

आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआइ के सामने पेश हुए शिवकुमार

कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष डीके शिवकुमार बुधवार को बेंगलुरु में सीबीआइ अधिकारियों के सामने हाजिर हुए। वह अपने खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूछताछ के लिए पेश हुए।सीबीआइ ने शिवकुमार को 19 नवंबर को नोटिस जारी कर 23 नवंबर को बुलाया था, लेकिन उन्होंने बेल्लारी, मस्की और बासव कल्याण में पूर्व से तय बैठकों का हवाला देते हुए कुछ समय मांगा था।

उनका आग्रह स्वीकार करते हुए सीबीआइ अधिकारियों ने उन्हें बुधवार को पेश होने को कहा था।पेश होने से पहले शिवकुमार ने कहा कि वह देश की प्रमुख जांच एजेंसी के अधिकारियों का पूरा सहयोग करेंगे। कांग्रेस विधायक शिवकुमार ने अपने समर्थकों से कहा कि घबराने कोई जरूरत नहीं है और उन्होंने ऐसा कोई गलत काम नहीं किया, जिससे बदनामी का सामना करना पड़े। सीबीआइ ने पांच अक्टूबर को इस मामले में 14 स्थानों पर तलाशी ली थी। कर्नाटक, दिल्ली और मुंबई में शिवकुमार एवं अन्य से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई थी।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

AIB News