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स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा- पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को करना होगा प्रतिष्ठित

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि जन-जन तक स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराना है तो पारंपरिक चिकित्सा पद्धति योग-नेचुरोपैथी व आयुर्वेद को व्यापक पैमाने पर प्रतिष्ठित करना होगा। प्राकृतिक चिकित्सा योग व आयुर्वेद के जरिये व्यक्ति स्वस्थ रहने की कला सीख सकता है। वह आयुष मंत्रालय के सहयोग से सूर्या फाउंडेशन व अंतरराष्ट्रीय नेचुरोपैथी संगठन (आइएनओ) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि देश में आम लोगों की यह धारणा है कि अमेरिका व यूरोपीय देशों में वैज्ञानिक व उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं।

अमेरिका व अन्य देशों में भी अब लोग योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, ऑर्गेनिक, होम्योपैथी व अन्य ड्रग रहित चिकित्सा के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वस्थ रहने के लिए हमेशा प्राकृतिक चिकित्सा पर भरोसा करते थे और अपने निकटवर्ती लोगों को इसके बारे में बताते थे। आयुष मंत्री श्रीपद नाईक ने कहा कि नेचुरोपैथी गांधी जी का प्रिय विषय था। उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा का ज्ञान व लाभ घर-घर गांव-गांव पहुंचाने के लिए 18 नवंबर 1946 को पुणे में ऑल इंडिया नेचर क्योर फाउंडेशन ट्रस्ट की स्थापना की थी।

इसका मुख्य उद्देश्य नेचुरोपैथी का प्रचार-प्रसार व नेचुरोपैथी विश्वविद्यालय स्थापित करना था। इससे पहले वेबिनार का उद्घाटन पद्मश्री जयप्रकाश ने किया। उन्होंने कहा कि योग प्राकृतिक चिकित्सा भारतीय परंपरा व संस्कृति की अमूल्य देन है। योग शरीर मन कर्म व प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बुधवार को कहा कि भारत के एचआईवी रोकथाम मॉडल को स्थानीय हस्तक्षेपों के अनुसार लक्षित हस्तक्षेप कार्यक्रम में शामिल करके कई देशों में अपनाया और बढ़ाया जा सकता है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एचआईवी रोकथाम के लिए ग्लोबल प्रिवेंशन कोएलिशन (जीपीसी) की एक मंत्री स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने एक बयान में कहा और उन्होंने स्वीकार किया कि वैश्विक एड्स प्रतिक्रिया ने नए संक्रमणों को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता दिखाई है, एचआईवी के लिए जीवित लोगों के लिए प्रमुख आबादी और उपचार सेवाओं के लिए रोकथाम सेवाओं तक पहुंच में सुधार। (PLHIV) और दूसरों के बीच एड्स से संबंधित मृत्यु दर को कम करने।

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