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SC on Loan Moratorium: सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल टाली लोन मोरेटोरियम मामले पर सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) मामले में सुनवाई होनी है। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली एक बेंच छह महीने की लोन मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज की माफी की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई मंगलवार दोपहर 12 बजे से फिर से शुरू होनी थी, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल के लिए इसे टाल दिया है।

इससे पहले जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता में जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की बेंच ने पांच अक्टूबर को लोन मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज पर माफी की मांग वाली याचिका की सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को अतिरिक्त हलफनामे फाइल करने का समय दिया था, जिन्हें आज संबोधित किया जा सकता है।

अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह मंगलवार को दोपहर 12 बजे सुप्रीम कोर्ट में एकत्रित हुए। कोर्ट की इस बेंच ने घोषणा की है कि इस मामले को बोर्ड (आज सुने जाने वाले दूसरे सभी मामलों के बाद) के अंत में सुना जाएगा।

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की बेंच बोर्ड (बार एंड बेंच) के अंत में मामले पर सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने ब्याज माफी के मामले को फिलहाल टाल दिया है। अब इस पर आज दिन के अंत तक सुनवाई शुरू होगी।

गौरतलब है कि लोन मोरेटोरियम मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने कहा है कि मौजूदा हालात में विभिन्न सेक्टर्स को और राहत देना संभव नहीं है। राजकोषीय नीति के मामले में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। पांच अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार के हलफनामे पर असंतोष जताया था। साथ ही केंद्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक को विस्तृत जानकारी के साथ हलफनामा देने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट में अपने नए हलफनामे में सरकार ने कहा, ‘नीतियां बनाना सरकार का काम है और अदालत को सेक्टर विशेष को वित्तीय राहत देने के मामलों पर विचार नहीं करना चाहिए। दो करोड़ रुपये तक के लोन पर मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज में दी गई राहत से ज्यादा कोई छूट देना अर्थव्यवस्था एवं बैंकिंग सेक्टर के लिए घातक होगा।’

इससे पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि दो करोड़ रुपये तक के एमएसएमई और पर्सनल लोन पर छह महीने की मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज नहीं वसूला जाएगा। इस छूट पर आने वाले खर्च को सरकार स्वयं वहन करेगी।

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