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भारत-अमेरिका ट्रेड डील की संभावना पर संशय, ट्रंप के कोरोना पोजिटिव होने से दोनों देशों के समझौते पर फिरा पानी

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले वहां जिस तरह की राजनीतिक अस्थिरता बनी है उसे देखते हुए अब भारत व अमेरिका के बीच सीमित दायरे के कारोबारी समझौते की संभावना क्षीण हो गई है। भारत सरकार के जो प्रतिनिधि एक पखवाड़े पहले तक कारोबारी समझौते होने की संभावना जता रहे थे वह भी मान रहे हैं कि अब नई सरकार के आने के बाद ही आसार हैं। जानकार बता रहे हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना पोजिटिव होने की वजह से ट्रेड डील के आसार पर पानी फिर गया है। भारत अपनी तरफ से मसौदे को तैयार कर चुका है और इस बारे में अमेरिकी सरकार को सूचना भी दी जा चुकी है। फैसला अमेरिकी सरकार को करना है।

दैनिक जागरण ने सीमित दायरे वाले कारोबारी समझौते (लिमिटेड ट्रेड डील) से जुड़े भारत व अमेरिकी पक्षों से बात की है। दोनो तरफ के प्रतिनिधियों का कहना है कि दो हफ्ते पहले तक समझौते को लेकर जो संभावना थी वह राष्ट्रपति ट्रंप के कोरोना पोजिटिव होने की वजह से लटक गई है। क्योंकि इस समझौते को राष्ट्रपति ट्रंप का मजबूत समर्थन हासिल है। तैयारी यह थी कि अभी इस सीमित समझौते को अंतिम रूप दिया जाए और फिर बाद में नई सरकार के आने के बाद व्यापक ट्रेड समझौते को आगे बढ़ाया जाए।

समझौते को अंतिम रूप देने को लेकर ट्रंप बना रहे थे दबाव

यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रेड डील की संभावना पूरी तरह से खत्म है, इस पर भारतीय पक्ष से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि, ”अब मुश्किल दिख रहा है। लेकिन अगर राष्ट्रपति ट्रंप जल्द से स्वस्थ्य हो जाते हैं तो कुछ कहा भी नहीं जा सकता।” दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति की यह इच्छा थी कि वह चुनाव से पहले कम से कम एक ट्रेड डील की सफलता का सेहरा अपने सर बांधे। राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी की सितंबर, 2019 की वाशिंगटन यात्रा और उसके बाद अपनी फरवरी, 2020 की भारत यात्रा के दौरान भी इस समझौते को अंतिम रूप देने को लेकर दबाव बना रहे थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करने की तैयारी में थे

ट्रंप प्रशासन की चीन के साथ ट्रेड समझौता होने की संभावना पहले ही खत्म हो चुकी है। भारत के साथ बातचीत पूरी हो चुकी है और अब सिर्फ तिथि तय करके दोनो तरफ के वाणिज्य मंत्रियों की तरफ से हस्ताक्षर होने की देरी थी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि प्रस्तावित समझौते में कुछ ऐसे प्रावधान है जिससे अमेरिका के लिए भारत में 10 अरब डॉलर का बाजार खुलने का रास्ता साफ होता। इस समझौते को अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करने की भी तैयारी में थे। बहरहाल, अब इसकी संभावना क्षीण दिखती है।

बताते चलें कि इस समझौते में भारत को भी अमेरिका की तरफ से दोबारा जेनरेलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफेरेंस (जीएसपी) की सुविधा बहाल करने की बात है। इससे भारत को अमेरिका को तकरीबन 6.5 अरब डॉलर के निर्यात का रास्ता खुलता। पिछले दिनों उद्योग व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी दी थी कि भारत की रफ से बहुत ही संतुलित मसौदा दिया गया है और अब समझौता का रूख अमेरिकी प्रशासन पर निर्भर है।

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