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Covid-19 संकट के बीच भारत-ASEAN का साइबर सुरक्षा पर भी फोकस

भारत-आसियाना समिट में साइबर अटैक के मुद्दे पर चर्चा हुई। दरअसल कोरोना काल में सबकुछ डिजीटल हो गया है। वर्क फ्रॉम होम से लेकर डिजिटल पेमेंट को भी बढ़ाया मिला है। ऐसे में साइबर अटैक का खतरा बढ़ गया है। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्वी) विजय ठाकुर सिंह ने साइबर अपराधों से जुड़े खतरों पर चर्चा करते हुए कहा कि आपसी सहयोग से ही साइबर अटैक के खतरों से बचा जा सकता है। ठाकुर ने समिट में प्रमुख डिजिटल इंडिया कार्यक्रम– प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल अभियान अभियान (प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान) और अगले पांच वर्षों के लिए राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति 2020 के साथ स्थिति से निपटने के लिए भारतीय पहल पर जोर दिया।

वहीं कुछ दिन पहले विदेश मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी पर तेजी से बढ़ती निर्भरता और कोविड-19 महामारी के मद्देनजर भारत और आसियान के बीच साइबर मंच को ‘ दुर्भावना रखने वाले किरदारों’ से सुरक्षित करने के उपायों को मजबूत करने और सहयोग करने की जरूरत है। मंत्रालय में सचिव (पूर्वी मामले) रीवा गांगुली दास ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से ‘डिजिटलीकरण’ में तेजी आई है और साइबर क्षेत्र में हमारा जुड़ाव- घर से काम करना नई परिपाटी बन गया है। ‘आसियान-इंडिया ट्रैक 1.5 साइबर संवाद’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नकद के कम इस्तेमाल से डिजिटल भुगतान पर निर्भरता बहुत बढ़ गई है।

दास ने कहा कि बड़े पैमाने पर आकंड़ों को ऑनलाइन साझा करने का काम हो रहा है। सोशल मीडिया की उपस्थिति बढ़ रही है। गतिमान और स्थायी आर्थिक विकास को पटरी पर लाने के लिए आपूर्ति तंत्र को चालू रखने में डिजिटल प्रौद्योगिकी अहम भूमिका निभा रही है।उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी पर हमारी बढ़ती निर्भरता और साइबर मंच का इस्तेमाल करने वालों की तेजी से बढ़ती संख्या के मद्देनजर ‘ दुर्भावना रखने वाले किरदार’ से हमारे साइबर डोमेन को सुरक्षित रखने के लिए कदमों को मजबूत करने की जरूरत है।

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