ब्रेकिंग
पेट्रोल-डीजल बचत पर बड़ा फैसला: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटाया अपना कारकेड हरियाणा की 5.72 लाख रुपए कीमत की अवैध शराब पकड़ाई, इंदौर आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई ट्रैक्टर का चालक नशे में मिला, इंदौर ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता से टला बड़ा हादसा! ट्रैक्टर पर लगा था नगर निगम का बोर्ड नगर निगम कार्य में लगे ट्रैक्टर का चालक नशे में पकड़ा, ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता से टला हादसा किसानों को बड़ी राहत: गेहूँ उपार्जन का 10,403 करोड़ रुपये भुगतान, 23 मई तक जारी रहेगी खरीदी विद्यार्थियों को दूसरा मौका, सपनों को नई उड़ान देने का संकल्प : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पीले चावल बांटकर किसान आंदोलन का न्योता, 7 मई 2026 के चक्काजाम से पहले की जारी की गई एडवाइजरी इंदौर में अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़, ‘डायमंड सर्वर’ से चल रहा था नेटवर्क 23,437 करोड़ की 3 बड़ी रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी, 6 राज्यों में बढ़ेगा रेल नेटवर्क इंदौर आबकारी विभाग की कार्रवाई: स्कूटर से शराब जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार

कोरोना का असर- दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की सूची में फिसला भारत

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की साल 2020 की लिस्ट जारी हुई है। हर साल की तरह इस बार भी इस लिस्ट में टॉप पर अमेरिका है। वहीं इस साल भारत दो पायदान नीचे खिसक गया है। इस साल की सूची में सबसे ज्यादा तेजी से ऊपर बढ़ने वाले देशों में वियतनाम पहले पर काबिज है। दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया और तीसरे पर ताइवान काबिज है। साल 2019 में भारत सबसे शक्तिशाली देशों की लिस्ट में शुमार था लेकिन इस बार कोरोना के कारण भारत लिस्ट से बाहर हो गया है। सिडनी स्थित लोवी इंस्टीट्यूट के एशिया पावर इंडेक्स 2020 के अनुसार, 2019 में भारत का पावर स्कोर 41.0 था जो 2020 में घटकर 39.7 हो गया है। इस लिस्ट में जिस देश का स्कोर 40 या इससे अधिक होता है उसे दुनिया की प्रमुख शक्ति माना जाता है।

लोवी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक एशिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश अब मध्य शक्ति वाली सूची में चला गया है। हालांकि, आने वाले सालों में यह देश फिर से इस सूची में शामिल हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडो-पैसिफिक के सभी देशों के बीच भारत ने कोरोना वायरस के कारण विकास की क्षमता को खो दिया है। लोवी इंस्टीट्यूट ने कहा कि 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था मूल रूप से महामारी से पहले के पूर्वानुमान की तुलना में 13 फीसदी कम रहेगी। इस कारण भारतीयों के खरीद करने की क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

इससे भविष्य के संसाधनों के माप (फ्यूचर रिसोर्स मिजर्स) पर भारत के स्कोर में लगभग पांच अंक की गिरावट आई है। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया का लोवी इंस्टीट्यूट हर साल दुनिया के प्रमुख देशों की आर्थिक क्षमता, सैन्य क्षमता, आंतरिक स्थिति, भविष्य की प्लानिंग, दूसरे देशों से आर्थिक संबंध, डिफेंस नेटवर्क, राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव और सांस्कृतिक प्रभाव का अध्ययन कर इस सूची को जारी करता है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.