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जो पानी जानवर पीते हैं, उसी से प्यास बुझाते हैं ये लोग, शिवराज के राज में MP का हाल देखिये

सतना: मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार भले ही विकास के लाख दावे करें लेकिन सतना जिले का कंचनपुर जिले का यह वीडियो उनके सारे दावों को खोखला साबित करता नजर आ रहा है। सतना जिले के इस गांव के लोग आजादी के 73 साल बाद भी जानवरों से भी बदतर जिंदगी जी रहे हैं। पानी की समस्या ऐसी कि लोग पानी की बूंद बूंद को तरसते हैं और गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार लोगों को हर मुलभुत सुविधाएं देने के बड़े बड़े दावे करती है वहीं ये वायदे जमीनी हकीकत पर फेल होते दिखाई दे रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण पानी की समस्या से जूझ रहे सतना के छोटे से गांव कंचनपुर की सोनौर आदिवासी बस्ती में देखने को मिला। जहां लगभग 40 घरों के बीच में लगे 2 हैंडपम्प महीनों से खराब पड़ा है, जिस कारण ग्रामीणों को पानी के जदोजहद करनी पड़ती है।

प्यास बुझाने के लिए उन्हें 1 किलोमीटर दूर से नदी से गंदा पानी भरकर पीना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच, सचिव  उनकी इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं देते, जिस कारण उन्हें मीलों का सफर तय कर गंदा पानी पीना पड़ता है। इस पानी को पिने से बूढ़े और बच्चे बीमार हो रहे हैं। लेकिन  सरपंच की मनमानी अनवरत जारी है ।

क्या बड़े और क्या बूढ़े सब अपने हाथों में बर्तन लेकर पानी की प्यास बुझाने के लिए निकल पड़ते हैं, नदी तक जाने के लिए रोड पार भी करनी पड़ती है, जिस कारण सड़क हादसे की आशंका भी बनी रहती है। साथ ही साथ ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर सरपंच की ऐसी ही मनमानी रही तो सभी आदिवासी बस्ती के लोग पैदल कोठी से चलकर सतना कलेक्टर से गुहार लगाएंगे।

शिवराज सरकार जहां गांव-गांव जाकर पेजयल की समस्या दूर करने की बात कहती नहीं थकती, वहीं असलियत इस सबसे परे है, अगर यही हाल रहा तो कई लोग प्यासे ही अपनी जान गंवा देंगे। अब देखना होगा मीडिया द्वारा ये मामला उठाए जाने के बाद क्या शासन-प्रशासन जागता है और इनकी समस्या का हल करता है, या नहीं ?

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