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उमर खालिद व शरजील ने ही रची थी दिल्ली दंगे की साजिश, बुलाई गई थी बंगाली बोलने वाली महिलाएं

नई दिल्ली। दिल्ली दंगे में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम व फैजान खान के खिलाफ दायर पूरक आरोपपत्र पर कड़कड़डूमा कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है। कोर्ट का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री है। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 2 दिसंबर के लिए तय की है। स्पेशल सेल द्वारा कड़कड़डूमा कोर्ट में दायर पूरक आरोपपत्र में कहा गया है कि दंगे में यही दोनों मुख्य साजिशकर्ता थे। इसमें भी रिमोट उमर के पास था। देश की छवि खराब करने के लिए ये दंगे कराए गए। आरोपपत्र में दंगे के लिए बनाए गए वाट्सएप ग्रुप का भी जिक्र किया गया है, जिसके जरिये लोगों को भड़काया गया।

स्पेशल सेल ने आरोपपत्र में यह भी कहा है कि उमर खालिद ने बंगाली भाषा बोलने वाली व बुर्का पहने 300 महिलाओं को पथराव करने के लिए बुलाया था। बता दें कि फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली आए हुए थे, तभी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के नाम पर यहां दंगे भड़काए गए। इसकी शुरुआत जामिया से की गई, लेकिन वहां सफलता नहीं मिली। इसके बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली से दंगे की आग भड़काई गई।

स्पेशल सेल ने सितंबर में कोर्ट में आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, उमर, शरजील व पिंजरा तोड़ संगठन के कई सदस्यों के खिलाफ दंगे का मुख्य आरोपपत्र दायर किया था। अब उमर और शरजील के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया गया है।

उमर बचने के लिए चला गया था बिहार
उमर खालिद ने शातिर तरीके से दंगे की साजिश रची। दंगे से एक दिन पहले ही वह हवाई जहाज से बिहार के समस्तीपुर चला गया था ताकि उसपर शक न हो सके। जांच में पता चला है कि दंगा उसकी साजिश का हिस्सा था। बिहार से ही उसने साथियों के माध्यम से नापाक मंसूबों को अंजाम तक पहुंचाया। दंगे थमने के बाद वह दिल्ली लौट आया। आरोपपत्र में कहा गया है कि उमर खालिद दंगे का मास्टरमाइंड है, उसने साथियों के साथ मिलकर दंगे की साजिश रची। दंगे का रिमोट उसके पास ही था।

भड़काऊ भाषण देता रहा है शरजील
पुलिस के अनुसार, उमर खालिद को यह मालूम था कि शरजील इमाम अक्सर देशविरोधी व भड़काऊ भाषण देता रहता है। इसलिए उसने ताहिर हुसैन समेत अन्य साथियों के साथ मिलकर शरजील को भड़काऊ भाषण के लिए चुना। शरजील ने विशेष समुदाय में मौजूदा सरकार के खिलाफ जहर घोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

युवाओं का किया गया ब्रेनवॉश
आरोपपत्र में कहा गया है कि खालिद, शरजील, फैजान और ताहिर हुसैन ने साथियों के साथ मिलकर पहले युवाओं का ब्रेनवॉश किया। चंद लोगों ने पहले मिलकर दंगे की साजिश रची और उसके बाद ब्रेनवॉश करके दंगाइयों की फौज तैयार करते रहे। सरकार के खिलाफ भड़काने के लिए वह उनसे कहते थे कि सरकार उन्हें किसी कीमत पर नौकरी नहीं देगी। ये लोग इंटरनेट से फर्जी आंकड़ों को जुटाते और युवाओं को दिखाते।

जिहाद के नाम पर बरगलाया

उमर खालिद ने जिहाद के नाम पर विशेष समुदाय के लोगों को बरगलाया। सीएए के विरोध में जगह-जगह आयोजित किए गए धरने प्रदर्शनों में उन्हें पुरानी कहानियां सुनाई गई। इंटरनेट से निकालकर ¨हसा से जुड़े वीडियो दिखाए गए। महिलाओं व पुरुषों को अलग-अलग तरीके से बरगलाया जाता था।

शिक्षित युवाओं को सौंपी थी विरोध प्रर्दशन की कमान

सीएए के विरोध के नाम पर आयोजित किए गए धरना-प्रदर्शन भले ही स्थानीय स्तर पर आयोजित किए गए थे, लेकिन उनकी कमान उमर ने शिक्षित युवाओं को सौंपी थी। इसके लिए जेएनयू व जामिया के विद्यार्थियों को चिह्नित किया गया था। उन्होंने प्रदर्शनों को पालियों में बांटा और इसमें आने वालों की सूची फोन में सुरक्षित रखी। प्रदर्शन में ऐसी फोटो प्रदर्शनी लगाई गई, जिससे लोगों को पुलिस प्रशासन के खिलाफ भड़काया जा सके।

पिंजरा तोड़ को दंगे के लिए चुना गयाआरोपपत्र में कहा गया है कि उमर ने दंगे करने और करवाने की जिम्मेदारी पिंजरा तोड़ संगठन को दी थी। इसके लिए संगठन के सदस्यों को रुपये दिए गए थे। संगठन ने 23 फरवरी की रात को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे चक्का जाम कर दिया और उसके बाद प्रदर्शन शुरू कर दिया ताकि पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करे और वह दंगा शुरू कर दे।

इंटरनेट कॉल से करते थे एक-दूसरे से संपर्क

उमर व उसके साथी इंटरनेट कॉल से एक-दूसरे से संपर्क करते थे, ताकि कोई उनकी बातों को रिकॉर्ड न कर सके। इसके साथ ही 25 से ज्यादा वाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे।

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