हार के बावजूद भी मंत्री बनी रहेगी इमरती देवी ! कहा- मैं हारी नहीं हूं… जीती हूं

भोपाल: उपचुनाव में 110% जीत का दावा करने वाली इमरती देवी भले ही चुनाव हार गई हो लेकिन उनके तेवर ज्यों के त्यों बरकरार है। अपने समधी से चुनाव हारने के बावजूद भी उन्होंने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया। बुधवार को उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि, मैं मंत्रिमंडल में इस्तीफा नहीं दूंगी मैं, हारी नहीं हूं.. जीती हूं। सत्ता सरकार मेरी है, जो जीते हैं वह एक हैंडपंप भी नहीं लगवा पाएंगे। इमरती देवी ने कहा, विधायक निधि का सारा पैसा कोरोना फंड में चला गया। अब वह क्या खर्च कर पाएंगे। हालांकि उनके साथ कांग्रेस छोड़ आए पीएचई मंत्री एंदल सिंह कंसाना भी चुनाव हार गए हैं और उन्होंने नैतिकता के आधार पर सबसे पहले मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंप दिया।

अपनी हार को किया स्वीकार, वहीं कमलनाथ पर साधा निशाना…
इमरती देवी ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा कि कुछ गलतियां हुई है जिनसे मुझे हार का सामना पड़ा। लेकिन मैं हारी नहीं हूं। कांग्रेस वोटर्स को बीजेपी वोटर्स में तबदील करना कोई छोटी बात नहीं है। बहुत बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है। कमलनाथ को तो मुंह काला हुआ है। सरकार हमारी बनी है। कमलनाथ तो मुंह धोकर ले गए।

सिंधिया की बेहद करीबी मानी जाने वाली इमरती देवी की इस ना के पीछे नियम है जिनके मुताबिक मंत्रिपद की शपथ लेने की तारीख से 6 महीने की अवधि में बिना विधायक रहे मंत्री पद पर बने रहने का प्रावधान है। इमरती सहित अन्य मंत्रियों ने 2 जुलाई 2020 को मंत्री पद की शपथ ली थी। उनका 6 महीने का कार्यकाल 1 जनवरी को पूरा होगा।

नियम अनुसार चुनाव हारने के बाद भी इमरती देवी, एंदल सिंह कंसाना व गिरिराज दंडोतिया 1 जनवरी तक मंत्री पद पर रह सकते हैं। इमरती देवी ने भले ही अपने मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया हो लेकिन 6 महीने बाद उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना ही पड़ेगा। वहीं सूत्रों की माने तो सीएम शिवराज दोनों वरिष्ठ नेताओं का सम्मान बरकरार रखने के लिए उन्हें निगम मंडल में एडजस्ट करेंगे, ताकि दोनों के बंगले भी बचे रहे।

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