Cover
ब्रेकिंग
महबूबा मुफ्ती का बड़ा आरोप, कहा- मोदी सरकार करना चाहती है पूरे मुल्क के टुकड़े Indian Idol 12 होस्ट आदित्य नारायण की शादी की रस्में शुरू, तिलक सेरेमनी का वीडियो आया सामने तेजस्‍वी का CM नीतीश पर तंज- बिहार में अपराधियों की बहार, जनता डरी तो बेबस बनी सरकार उत्तर भारत में सर्दी का सितम जारी, दिल्ली में 10 साल में सबसे अधिक ठंड मन की बात में बोले पीएम मोदी- नए कृषि कानून से किसानों को मिले नए अधिकार, नए अवसर शांति वार्ता से जुड़े दोनों पक्षों ने 21 मुद्दों पर अपनी सहमति जताई, राष्‍ट्रपति भवन ने कहा गतिरोध बरकरार हैदराबाद में अमित शाह का रोड शो, भारी संख्या में जुटे लोग गृह मंत्री अमित शाह ने की किसानों से तुरंत बातचीत की पेशकश, कहा- सरकार आपकी हर मांग पर विचार करने को तैयार Bigg Boss 14: रूबीना दिलैक बनीं बिग बॉस की पहली फाइनलिस्ट, जनवरी में नहीं अगले हफ्ते होगा फिनाले आइईडी विस्फोट में CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट शहीद, 10 जवान घायल

निजी जासूसों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की अपील की गई थी कि जब तक कोई संहिताबद्ध कानून अस्तित्व में नहीं आ जाता तब तक वह निजी जासूसों के कामकाज और अधिकार क्षेत्र को विनियमित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करे।

याचिका में गैर-कानूनी तरीके से हासिल की गई भारतीय नागरिकों की निजी जानकारियां दूसरे देशों को हस्तांतरित करने से रोकने के लिए सरकार को एक तंत्र बनाने का निर्देश देने की भी अपील की गई थी। जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा से कहा, कृपया आप इस याचिका को वापस ले लें या फिर हम इसे खारिज कर देंगे।

मखीजा ने दलील दी थी कि निजी एजेंसियों द्वारा जासूसी विनियमित नहीं है और इस मुद्दे पर विचार करने की जरूरत है। हालांकि बाद में उन्होंने याचिका वापस ले ली। हरियाणा की एक महिला ने याचिका दायर कर आरोप लगाया गया था कि दिल्ली स्थित कंपनी के दो निजी जासूसों ने बिना किसी अनुमति के उनकी निजी जानकारी हासिल की और अमेरिका निवासी एक व्यक्ति को भेज दी। याचिका में आरोप लगाया गया कि धोखाधड़ी से हासिल इस जानकारी का इस्तेमाल एक अमेरिकी नागरिक वहां की एक अदालत में कर रहा है। वीडियो कांफ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई में पीठ ने मखीजा से कहा कि आप हमें बताएं कि हम कैसे एक निजी निकाय को परमादेश रिट जारी कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि गृह मंत्रालय को परमादेश रिट जारी की जा सकती है। इसे विनियमित करने के लिए कोई कानून नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह (याचिकाकर्ता के) निजी जीवन में दखलअंदाजी है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

AIB News