Cover
ब्रेकिंग
शादी के बाद एक्स ब्वॉयफ्रेंड कुशाल टंडन से टकराईं गौहर ख़ान, दिया ये रिएक्शन राहुल के इटली ट्रिप पर भाजपा का निशाना, शिवराज बोले- स्‍थापना दिवस पर ‘9 2 11’ हो गए, कांग्रेस ने दी सफाई पीएम मोदी, भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं ने दी श्रद्धांजलि दर्ज हुए 20 हजार से अधिक संक्रमण के नए मामले, 279 मौत; जानें अब तक का पूरा आंकड़ा उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत Delhi AIIMS में कराएंगे उपचार, कोरोना से हैं संक्रमित देश की पहली ड्राइवरलेस मेट्रो को पीएम ने दिखाई हरी झंडी, दिल्ली में रफ्तार भरने लगी ट्रेन किसान नेता राकेश टिकैत को फोन पर मिली जान से मारने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस Year 2021- नया साल लेकर आ रहा ग्रहण के चार गजब नजारे, पूर्ण चंद्रग्रहण से होगी शुरुआत शीतकालीन सत्र पर बोले नरोत्तम, सरकार की कोशिश कि इसे न टाला जाए, कांग्रेस पर भी साधा निशाना MP के इस गांव में न सड़क है न कोई सुविधा, खाट पर रखकर ग्रामीण 3 KM ले गए शव

टिकट खरीदकर भी ट्रेन में सफर नहीं कर पाए सवा करोड़ यात्री, खत्म नहीं हुआ इंतजार

नई दिल्लीः प्रतीक्षा सूची में नाम रह जाने के चलते 2019-20 में एक करोड़ से अधिक यात्री ट्रेनों से सफर नहीं कर सकें। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दायर एक अर्जी के जरिए यह जानकारी सामने आई है, जिससे यह संकेत भी मिलता है कि देश में व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की कमी है। अर्जी के जवाब में यह बताया गया है कि 2019-20 में कुल 84,61,204 ‘‘पैसंजर नेम रिकार्ड” (पीएनआर) प्रतीक्षा सूची में रह जाने के चलते खुद-ब-खुद रद्द हो गए। इन पीएनआर के जरिए सवा करोड़ से अधिक यात्रियों के यात्रा करने का कार्यक्रम था।

रेल मंत्रालय ने निजी क्षेत्र की ट्रेनें पेश कर पहली बार ट्रेन यात्रा के लिए प्रतीक्षा सूची को घटाने की दिशा में कदम उठाया है। रेलवे ने अधिक यात्री वाले मार्गों पर विशेष ‘क्लोन ट्रेनें’ भी पेश की हैं। इन ट्रेनों का सीमित संख्या में ही ठहराव /हाल्ट है। इनमें मुख्य रूप से तृतीय श्रेणी के एसी डिब्बे शामिल हैं जो उसी मार्ग पर पहले से संचालित हो रहीं ‘स्पेशल ट्रेनों’ से पहले परिचालित होंगी। इन ‘क्लोन ट्रेनों’ की अग्रिम बुकिंग अवधि 10 दिनों की है। पीएनआर के रद्द हो जाने के बाद टिकट बुकिंग की रकम यात्रियों को वापस मिल जाती है।

मध्य प्रदेश के आरटीआई कार्यकर्ता चंद्र शेखर गौड़ द्वारा दायर आरटीआई अर्जी के जवाब में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों में करीब पांच करोड़ पीएनआर प्रतीक्षा सूची में रह जाने के कारण स्वत: ही रद्द हो गए। वर्ष 2014-15 में, रद्द हुए पीएनआर की संख्या 1,13,17,481 थी, 2015-2016 में 81,05,022, 2016-2017 में 72,13,131, इसके बाद के साल में 73,02,042 और 2018-2019 में यह संख्या 68,97,922 थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2019-20 में प्रतीक्षा सूची में 8.9 प्रतिशत की औसत कमी आई। वहीं, व्यस्त अवधि के दौरान 13.3 प्रतिशत यात्रियों को कंफर्म टिकट नहीं मिल सका।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

AIB News