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इस साल फेस्टिवल सीजन में छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से आएगी ज्यादा सेल : रिपोर्ट

नई दिल्ली. भारत में फेस्टिवल सीजन सेल की शुरुआत हो गई है। ऐसे में भारी डिमांड आने की उम्मीद जताई जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार यह मांग छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से ज्यादा आ रही है। उषा इंटरनेशनल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजय शर्मा के मुताबिक ऐसे में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दोबारा से पटरी पर लौटने के लिए इसे काफी अच्छा माना जा रहा है। साथ ही यह उपभोक्ता वस्तएं बनानेवाली कंपनियों के विकास के लिए भी बेहतर साबित हो सकता है। आने वाले माह में पूरे देश में बनने वाला फेस्टिवल सीजन इंडस्ट्री के लिए भी काफी अहम होगा। इस साल तो रुझान बता रहे हैं कि जो कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में जीत हासिल करेगी, उसे बहुत ही लाभ होने वाला है।

टियर II और III क्षेत्रों में वस्तुओं की मांग बढ़ने की वजह 

हमें यह समझना चाहिए कि टियर 2 और 3 इलाकों में त्योहारों का मनाने की तैयारी में ही उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में आई तेजी का कारण छिपा है। इसके अलावा भी कई अन्य कारण हैं, जिसकी वजह से छोटे शहरों में मांग काफी बढ़ी है। कृषि के लिए इस बार मौसम काफी अच्छा रहा, जिससे पैदावार अच्छी रही और मनरेगा में भी अच्छा भुगतान हुआ है। इसके साथ ही ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत काफी लोगों को रोजगार मिला, जिससे कि ग्रामीण क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था को काफी बढ़त मिली है। साथ ही फैक्ट्री में काम करने वाले कामगारों और मजदूरों के वापस लौट आने की वजह से घरेलू सामान जैसे कि एयर कूलर, पंखे, घर एवं रसोई के उपकरणों की मांग काफी बढ़ गई है।

ग्रामीण बाज़ारों की अहमियत

भारत के 6.5 लाख गांवों में 85 करोड़ उपभोक्ता रहते हैं। यह देश की करीब 70% जनसंख्या हैं और देश की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में लगभग 50 % का योगदान देते हैं। इस प्रकार भारत में ग्रामीण इलाकों की नब्ज पकड़ने के लिए ब्रांडों और व्यवसायों को इस बाजार की क्षमता को पहचानना जरूरी है। भारत में ग्रामीण उपभोक्ता सामान बनानेवाली कंपनियों के प्रति ज्यादा सजग और निष्ठावान हैं। वे उन सुप्रसिद्ध नामों पर भरोसा करने के इच्छुक हैं जो उनकी आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के साथ जुड़े हुए हैं। कई ग्रामीण उपभोक्ता विश्वसनीय ब्रांड के सामान को खरीदने पर भी गर्व महसूस करते हैं, क्योंकि उनके लिए यह एक ‘स्टेटस सिंबल’ है

ग्रामीण भारत की डिजिटल धुरी

यह भी समझने लायक बात है कि इस वर्ष पहली बार भारत में शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। यह विभिन्न कारकों जैसे कि टियर II और III क्षेत्रों में जीवन शैली के अभिसरण, कम लागत वाली इंटरनेट की उपलब्धता आदि के कारण है। इसके अलावा जब से महामारी के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन और कामगारों व मजदूरों की वापसी का दौर शुरू हुआ है, तब से ग्रामीण बाजारों में उपभोक्ता ज्यादा से ज्यादा समय डिजिटल उपकरणों यानी मोबाइल आदि पर बिता रहे हैं, इसके कारण डेटा की खपत में भारी वृद्धि हुई है। ग्रामीण उपभोक्ता में एक अनोखी प्रवृत्ति देखी गई है कि वे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी के बजाय अपने आसपास की दुकानों पर ज्यादा विश्वास करते हैं। साथ ही वे सामान को तो ऑनलाइन देखकर चुन लेते हैं लेकिन खरीदारी  अपने आसपास की दुकान से ही करते हैं। ग्रामीण भारत में बढ़ती समृद्धि और संपन्नता व डिजिटल उपकरणों पर लोगों की बढ़ती मौजूदगी से उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में और वृद्धि होने की संभावना है

ब्रांड्स के ग्रामीण नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत 

यह अच्छी बात है कि बड़े या छोटे सभी शहरों के उपभोक्ता आकांक्षी बन रहे हैं और ऑनलाइन उत्पादों की खोज कर रहे हैं। साथ ही ब्रांडों और उनके उत्पादों के बारे में जान रहे हैं। यही कारण है कि व्यवसायों और ब्रांडों को देश भर में अपने व्यापार को बढ़ाने और ग्रामीण बाजारों में अपने वितरण और बिक्री व्यवस्था के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

कंपनियों को चाहिए कि वे भारत के सभी हिस्सों में उपभोक्ताओं की सेवा के लिए अपने ई-कॉमर्स तंत्रों के बढ़ते डिजिटल विस्तार और मजबूती पर ध्यान दें। एक बार जब ब्रांड ग्रामीण बाजारों में सही मायने में कारोबार शुरू कर देते हैं, तो अवसरों को बढ़ाना और बढ़ते व्यवसायों के लिए उनका लाभ उठाना आसान हो जाता है। यह केवल तभी होता है जब ब्रांड रणनीतिक रूप से अपने भौगोलिक पदचिह्न का निर्माण करते हैं, जिससे उन्हें एहसास होगा कि ग्रामीण उपभोक्ता कैसे उन्हें बड़ी जीत दिलाने में मदद कर सकते हैं। ब्रांड जो अंतिम छोर को भी जोड़ रहे हैं और खुद को ग्राहक के करीब उपलब्ध करा रहे हैं, उन्हें तेजी से बढ़ने का अवसर मिलेगा

भारत की अर्थव्यवस्था के रिवाइवल के लिए ग्रामीण सशक्तिकरण

ब्रांड्स के पास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मदद पहुंचाकर उसका उत्थान करने और देश के टियर II, III शहरों और देश के भीतरी इलाकों में रोजगार उत्पन्न करने की एक अंतर्निहित जिम्मेदारी है। उद्देश्य-आधारित पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ाने और ब्रांड प्रतिष्ठा को बढ़ाने में मदद करती हैं। सही मायनों में सशक्त और लुभाने वाला यही ग्रामीण बाजार है जो अंततः भारत की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करेगा। इसे सहजता से कहें तो अब ग्रामीण भारत में ब्रांडों के लिए समय है और वे सभी पूर्वधारणा वाली  रूढ़ियों को छोड़ दें, जो ग्रामीण भारत के बारे में हैं। आज का ग्रामीण उपभोक्ता इस त्योहारी सीजन में उपभोक्ता वस्तुओं के उद्योग के विकास को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की कुंजी रखते हुए, अच्छी तरह से वाकिफ, जागरूक और आकांक्षात्मक होने के कारण पारंपरिक पूर्वाग्रहों को भी खारिज कर रहा है।

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